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अमेरिकी ऑपरेटिव मैथ्यू वैन डाइक को भारत में किया गया गिरफ्तार, हुए बड़े खुलासे

 Published : Mar 19, 2026 02:24 pm IST,  Updated : Mar 19, 2026 02:24 pm IST

भारत में एक अमेरिकी नागरिक को गिरफ्तार किया गया है। जिस अमेरिकी नागरिक को गिरफ्तार किया गया है उसका नाम मैथ्यू वैनडाइक है। वैनडाइक की गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा एजेंसियों को कई अहम सुराग मिले हैं।

American Operative Matthew VanDyke- India TV Hindi
American Operative Matthew VanDyke Image Source : @RT_INDIA_NEWS/ (X)

American Operative Arrested In India: भारत में एक अमेरिकी नागरिक की गिरफ्तारी से एक हाईलेवल जांच में कई अहम सुराग मिले हैं, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलू भी शामिल हैं। मैथ्यू वैनडाइक उन सात विदेशियों में से एक था जिसे 2 दिन पहले भारत के खिलाफ रची गई एक कथित साजिश के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बताया कि आरोपी भारत के रास्ते अवैध रूप से म्यांमार में घुसा था, ताकि वहां के जातीय सशस्त्र समूहों और भारत के कुछ प्रतिबंधित समूहों को ट्रेनिंग दे सके।

मोबाइल फोन की जांच में क्या मिला?

मैथ्यू वैनडाइक के सोशल मीडिया फ़ुटेज और मोबाइल फोन की जांच करने पर अधिकारियों को अब पता चला है कि वैनडाइक पहले भी विदेशों में कई सैन्य संघर्षों और अभियानों से जुड़ा रहा है। अब जांच का मकसद यह पता लगाना है कि वह पूर्वोत्तर भारत तक कैसे पहुंचा और किस मकसद से आया था। अमेरिकी दूतावास ने पुष्टि की है कि उसे इस स्थिति की जानकारी है, लेकिन उसने इस बारे में और अधिक जानकारी देने से इनकार कर दिया।

विद्रोह का समर्थक है वैनडाइक

जांच के दौरान अधिकारियों को कई रिकॉर्डिंग मिली हैं जिनमें कथित तौर पर वैनडाइक को दुनिया भर में होने वाले विद्रोहों का समर्थन करते हुए सुना गया। उसने कहा कि उसका मकसद सिर्फ विदेशी लड़ाकों को लड़ाई में भेजना नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों को खुद के लिए लड़ने के लिए प्रशिक्षित करना था। वैनडाइक ने तो किराए के सैनिकों से वेनेज़ुएला, म्यांमार और ईरान में विद्रोही गुटों में शामिल होने के लिए वैश्विक अपील भी जारी की थी।

क्यों अहम मानी जा रही है वैनडाइक की गिरफ्तारी?

भारत में उसकी गिरफ्तारी इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि माना जाता है कि उसका संबंध पूर्वोत्तर में सक्रिय हथियारबंद नेटवर्क से है। यह भी माना जा रहा है कि वैनडाइक ड्रोन संचालन और आधुनिक युद्ध तकनीकों में प्रशिक्षण दे रहा था। उसकी गिरफ्तारी से सुरक्षा से जुड़े कई बड़े सवाल खड़े होते हैं, खासकर यह कि क्या भारतीय क्षेत्र का इस्तेमाल एक ट्रांजिट कॉरिडोर (आवागमन के रास्ते) के तौर पर किया जा रहा था और क्या उसका भारत-विरोधी और प्रतिबंधित गुटों से कोई संबंध था। जासूसी और खुफिया जानकारी जुटाने के पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

आधुनिक युद्ध का माहिर है वैनडाइक

वैनडाइक खुद को एक सुरक्षा विश्लेषक, डॉक्यूमेंट्री फिल्मकार और वॉर कॉरेस्पोंडेंट बताता था। सूत्रों का कहना है कि इस रहस्यमयी शख्स के कई और भी पहलू हैं। सूत्रों के मुताबिक, यह अमेरिकी नागरिक एक भाड़े का सैन्य प्रशिक्षक था, जिसके बारे में कहा जाता है कि उसका पहले अमेरिकी सेना से भी जुड़ाव रहा है। उसने इराक और अन्य युद्ध क्षेत्रों में भी सेवा दी है। सूत्रों ने यह भी बताया कि उसने "स्पेशल फोर्स की ट्रेनिंग भी ली है, जिसमें गुरिल्ला युद्ध, रणनीतिक अभियान, ड्रोन का इस्तेमाल और आधुनिक युद्ध तकनीक'' जैसे विषय शामिल हैं।

लीबियाई गृहयुद्ध के दौरान वैनडाइक को मिली शोहरत

वैनडाइक को लीबियाई गृहयुद्ध के दौरान काफी शोहरत मिली थी। बताया जाता है कि यूनिवर्सिटी की पढ़ाई पूरी करने के बाद उसने उत्तरी अफ्रीका और मध्य पूर्व की मोटरसाइकिल से यात्रा शुरू की थी। इस दौरान, उसकी लीबिया के लोगों से दोस्ती हो गई। जब वहां क्रांति भड़की, तो वह विद्रोही लड़ाकों के साथ शामिल हो गया। उसे गिरफ्तार कर लिया गया और लगभग छह महीने तक बंदी बनाकर रखा गया। हालांकि, वह वहां से भाग निकलने में कामयाब रहा और 2011 में युद्ध खत्म होने के बाद अमेरिका लौट आया।

वैनडाइक ने की SOLI की स्थापना

अमेरिका लौटने के बाद वैनडाइक ने सीरियाई क्रांति पर एक डॉक्यूमेंट्री बनाने की योजना बनाई, जो शुरू भी हो गई थी। हालांकि, ISIS ने जब अमेरिकी पत्रकारों जेम्स फॉली और स्टीवन सॉटलॉफ की हत्या कर दी तो उसने अपनी योजना बदल दी और सशस्त्र समूहों को ट्रेनिंग देने पर ध्यान केंद्रित किया। इसके बाद उसने दुनिया भर के सशस्त्र समूहों को ट्रेनिंग देने और सलाह देने के लिए 'सन्स ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल' (SOLI) की स्थापना की। जेम्स फॉली और स्टीवन सॉटलॉफ वैनडाइक के दोस्त थे।

साजिश तो नहीं?

फिलहाल, वैनडाइक की गिरफ्तारी का संबंध बड़ी अंतरराष्ट्रीय साजिश की ओर इशारा करता है, जो संभव है कि भारत को अस्थिर करने की एक व्यापक रणनीति हो सकती है। कुछ विश्लेषकों का यह भी मानना ​​है कि इसके पीछे यूक्रेन से जुड़ा कोई नेटवर्क हो सकता है, खासकर तब जब राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने विदेशों में विशेष अभियानों की आवश्यकता पर जोर दिया था। इससे पहले, सूडान, माली, सीरिया और लीबिया जैसे संघर्ष वाले क्षेत्रों में भी यूक्रेन की मौजूदगी देखी गई थी।

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